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पीरियड आने के बाद क्या करना चाहिए ? ( simple home remedies to get rid of period pain )

क्या करना चाहिए की टीम ने सोचा है की, पीरियड आने के बाद क्या करना चाहिए ? इस समस्या का समाधन कर देते है. इसीलिए, पीरियड्स की जानकारी देने का decide लिया. कारण, कुछ पर्सनल ग्रुप के मेम्बर बता रहे है की, महिलाओ की समस्या पर भी कुछ content बना दीजिये. becasue, हमारा content बहुत सारे लोग पढने लगे है. महिलाओ को अक्सर पीरियड की problem आती रहती है. आज इस के बारे मैं पूरा समज लेंगे. पीरियड के बारे मैं होने वाली saari परेशानी का समाधान इस content मन मिल जायेगा.

कुछ बाते मैंने मेरे फ्रेंड से पूछकर बताई गइ है. because मैं तोह लड़का हूँ. but एक न एक detail आपको इस content मैं मिल जाएगी. पहले जो भी आपके सवाल है उसे पहले देख लेते है.

[ Note: पीरियड के अलग अलग नाम लिए जाते है. इतने बड़ी कंट्री मैं बहुत सारे प्रांत मैं अलग नाम है. जैसे की, माहवारी, एमसी, मासिक धर्म. इन सबका अर्थ एक ही है. इन शब्दों का अगर content मैं ज़िक्र होता है. तो, कंफ्यूज मत हो जाएये. उन सबका अर्थ पीरियड ही है. ]

  1. पीरियड के तीसरे दिन क्या होता है?
  2. गुड़ खाने से पीरियड आता है ?
  3. पीरियड time क्या होता है?
  4. पीरियड की साइकिल ?
  5. पीरियड आने के लिए क्या खाना चाहिए ?
  6. पीरियड कितने दिन लेट हो सकता है ?
  7. एमसी रुकने का क्या कारण है ?
  8. पीरियड लेट आने के क्या कारण हो सकते है ?
  9. रुका हुआ पीरियड कैसे आयेगा ?
  10. पीरियड खुलकर आने के उपाय.
  11. 5 मिनट मैं मासिक धर्म लाने का उपाय
  12. पीरियड के कितने दिन बाद अंडा बनता है?
  13. पीरियड मैं संबंध बनाने से क्या होता है?
  14. period ke kitne din bad baby conceive hota hai ?
  15. पीरियड को नियमित कैसे करे ?
  16. पीरियड को रेगुलर करने के लिए क्या खाना चाहिए ?
  17. पीरियड अनियमित होने के कारण.    

इन सारे प्रश्नों का समाधानकारक उत्तर आपको मिल जायेगा. साथ मैं थोड़ी बहुत प्रेगनेंसी जुडी की जानकारी मिल जायेगा.

पीरियड मतलब क्या होता है ? ( व्हाट इस पीरियड / what is period ? )    

पीरियड मतलब क्या होता है ? ( व्हाट इस पीरियड / what is period ? )

month मैं minimum 2 दिन और maximum ७ दिन महिलाओं के योनी से रक्तस्त्राव होता है. अगर अपने विज्ञानं के विषय मैं महिलाओ का योनी का internal structure देखा होगा. तो, वहा पे 2 ओवरी होती है. एक यूट्रस होता है.उस ओवरिएस मैं ओवाह्म मतलब की अंडा बनता है. और अगर उस time कोई स्पर्म अंदर जाता है. तब प्रेगनेंसी होने की सम्भावना होती है. ये हो गया एक part. अब आपको दूसरा part समजा देता हूँ. आखिर पीरियड क्यूँ और कैसे आते है.

चलो consider करते है. month के १ तारीख को एक महिलो का पीरियड्स आते है. तब १ ते ७ तारीख के बिच मैं स्पर्म गए तो भी प्रेगनेंसी नहीं होगी. becasue, ओवारिस ओवाह्म ( अंडा ) बना नहीं रही होती है.

अब बात करते है अगले ७ ते १४ दिन के बारे मैं, इस दौरान ओवारिस वापस अंडा बना देती है. और इस दौरान कोई स्पर्म अंदर चला गे तो, प्रेगनेंसी होने के chances है.

जो ७ ते १४ दिन मैं process होती है. वही, अगले १४ ते २१ दिन मैं भी होता है.

आब आखिर के २१ ते २८ दिन के बीतच अगर कोई स्पर्म नहीं अंदर गया. तो, जो ओवरिस ने अंडा बनाया है. ओ योनी के through निकल जाता है. इसे पीरियड की साइकिल कहा जाता है.

हाँ अगर किसी कपल का बच्चे को जन्म देने की प्लानिंग कर रहे हो. तो, ७ से २१ इन दिनो के बिच स्पर्म अगर अंदर यूट्रस मैं जाये तो, फीमेल का अंडा और मेल के स्पर्म मिल जाते है. then महिला गर्भवती हो सकती है.

योनी और यूट्रस के बिच मैं हायपन नाम की बहुत पतली लेयर होती है. जो महिला एक्सरसाइज और कम करती है. काम मतलब दो तिन बार जीना भी उपर निचे किये तो, ओह हायपन ब्रेक हो जाता है. और ब्लीडिंग होती है. और हमारे lifestyle मैं अगर कोई लड़की की सुहागरात मैं सेक्स के बाद ब्लीडिंग नहीं हुआ तो, उसे चरित्रहीन कहते है. असल मैं ये सब उस हायपन की वजह से होता है. अगर आपको लड़की की ब्लीडिंग चहिये तो, १४, १५ साल की लड़की से शादी कीजिये. तब ब्लीडिंग हो जाएगी. ओ वेहम निकल दीजिये मन से की शादी के पहेली नाईट मैं सेक्स के बाद ब्लीडिंग होनी चाहिए. ओ पूरी तरह से झूटी कहानी है. पहले knowledge लीजिये. ऐसे बातो पर विश्वास मत रखिये.

अब बात निकल आई तो, ये छोटी और सबसे कम की जानकारी आपको दी गई है. कमेंट मैं जरुर बताना कैसी लगी.

पीरियड मैं दर्द क्यों होता है ?        

पीरियड मैं दर्द क्यों होता है ?

पीरियड मैं दर्द होना इस डॉक्टर लोग डिसमेनोरिया कहते है. आम तोर पर यह समस्या हर कोई महिला को आता है. और ये कोई बड़ी बीमारी और रोग नहीं है. यह दर्द पीरियड्स से पह;ले आता है. लगबग दो और तिन दिन पहले आता है. पेट के साथ, पेट के निचले हिस्से pain होता है. जांघो के साथ घुटनों मैं भी pain होता है. डिसमेनोरिया दो type के होते है. primary and secondary जो हम निचे विस्तार मैं देखेंगे.

  1. प्राइमरी डिसमेनोरिया:

यह pain आमतोर पर जोछोटी लडकिया रहती है. जिनकी उम्र १४ से १८ होती है. उन्हें हम primary डिसमेनोरिया होता है. इस मैं ज्यादा परेशान होनी की बात नही है. बहुत भयानक pain नही होता है. पेट मैं दर्द होता है. और जांघो मैं दर्द होता है. इस दर्द को मेडिसिन लेकर ख़त्म कर सकते है. और कुछ घरेलु उपचार कर के पीरियड मैं पेट दादर होने वाली समस्या को ख़त्म कर सकते है. young और school girl मैं इस तरह की समस्या आती है. कमर pain करना, thys pain करना, पेट ख़राब होना, अजीब mood स्विंग होना. इस तरह की समस्य होती है. जो की छोटीसी problem है. इसे गर्भनिरोधक गोली लेके खत्म कर  सकते है.

  • सेकेंडरी डिसमेनोरिया:

यह स्टेज जब तक लड़की की उम्र २० के उपर चली नहीं जाती तब तक नहीं होता. ज्यादा तर जिन महिलाओं की उम्र २० से ३५ है. उन्हें ज्यादा तर इस तरह की समस्या हो सकती है. अगर गर्भाशय मैं फ़ायब्रोयाड्स, पेल्विक इन्फ्लेमेटरी ऐसे बीमारी है. तो, इसका pain बहुत दर्दनाक होता है. और इसका pain पीरियड के पुरे साइकिल मैं होता है. पीरियड लम्बे time तक हो जाता है. गर्भाशय मैं गाठ होना, सुजन आना, सफ़ेद पानी आना, blood over flow होना, सेक्स के time बहुत भयंकर pain होना. और पेट के दर्द के साथ कब्ज, गैस की समस्या भी होना. अगर प्रोटोग्लानडीन हार्मोन बढ़ जाता है. तो और pain increase होता है. इस तरह की परेशानियो से गुजरना पड़ता है. so, आप किसी गायनाकॉलजिस्ट से बेझिजक बात कर लीजिये. और आपको जो भी समस्या आ रही है. उन्हें बता दीजिये. और सही ट्रीटमेंट ले लीजिये. और ये क्यों होता है? ज्यादा स्ट्रेस लेना, ज्यादा चिंता करना, एक्सरसाइज बिलकुल भी नही करना. emotional weakness से भी ये स्टेज आ सकती है. पीरियड के दर्द के घरेलु उपचार हम निचे बता देंगे.

पीरियड सही time पर क्यों नहीं आते है ?

पीरियड सही time पर क्यों नहीं आते है ?

अभी का lifestyle इतना बदला गया है. की, कुछ healthy feel होता ही नही है. so, पीरियड का टाइम पर नहीं आना? पीरियड बहोत लेट आना? पीरियड मैं पेट मैं बहुत दर्द होना? इस तरह की परेशानी आती रहती है. तो, ऐसा क्यूँ होता है. ये देखते है.

महिलाओं मैं अभी एक नहीं समस्या आई है. उसे PCOS ( polycystic ovary syndrome ) कहते है. यह समस्या अभी बहुत तेजी से बढ़ रही है. अंडाशय मैं अंडा नहीं बनाना, हमारे अंडाशय मैं तीन हार्मोन होते है. दो ओवारिस मैं हार्मोन तयार होते है. अस्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रोजन, रिलैक्सिन ये तीन हार्मोन होते है.

  • अस्ट्रोजन: ये हार्मोन female के breast size को बढ़ाने मैं हेल्प करता है. और male circulation कम करता है. जैसे की दाढ़ी, शरीर पर बाल ये चीजे बढ़नी नही देता है. और testrosteron को बढ़ने नही देता है. inshort, male के हार्मोन्स बढ़ने नहीं देता है.
  • प्रोजेस्ट्रोजन: ये हार्मोन प्रोटेक्शन का काम करता है. जो बच्चा माँ के गर्भाशय मैं होता है. उसे प्रोटेक्ट करता है. inshort, जो शिशु गर्भाशय मैं है. उसे किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने देता.
  • रिलैक्सिन: ये हार्मोन relax फील करता है. जिन महिला की delivery normal होती है. उन मैं रिलैक्सिन हार्मोन काफी मात्रा मैं होता है.

अब बात करते है. आखिर क्या reason होता है. पीरियड लेट आने के पीछे. सबसे important बात, हार्मोन का disbalance होना. यानि की, एक overy हार्मोन बनाती है. एक नहीं. इससे किसी एक ही हार्मोन की quantity ज्यादा होना. यही सबसे महत्वपूर्ण reason है. प्रोजेस्ट्रोजन हार्मोन ओवारिस नहीं बनती. तो, पीरियड iregular आते है. पीरियड आगे पीछे होने मैं हार्मोन का disbalance होना. यही कारण होता है. इसकी वजह से ये PCOS ( polycystic ovary syndrome ) नई परेशानी आई है. अब जान लेते है. हार्मोन disbalance क्यूँ होते है. और PCOS क्यों आती है.

  • अगर किसी को हायपो थायरोइड होता है. इसकी मात्रा कम होने से ओवरी का फंक्शन ठिकसे नही होता है.
  • अगर इन्सुलिन की मात्रा ज्यादा होती है. तो, ओवरी पर असर पड़ता है.
  • एड्रेनिल ग्लैंड जो किडनी के ऊपर रहता है. अगर उसकी मात्र बढ़ जाती है. तब testrosteron जैसे हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है. और उसकी वजह से चेहरे पर बाल निकल आते है.
  • प्रोलैक्टिन हार्मोन हो brain के ग्रंथि मैं रहता है. इस हार्मोन की मात्रा बढ़ गए तो, जिससे ओवरी का फंक्शन ठीक से नहीं होता है.   
  • खान पान का सही तरह सेवन नही करना
  • nutrition का सेवन नहीं होना.
  • प्रोटीन और फायबर युक्त पदार्थोओ का सेवन नहीं करना.
  • ज्यादा स्ट्रेस लेना. और चिंता करना.
  • grains का सेवन कम होना.
  • junk food खाना,
  • एक्सरसाइज नहीं करना.

PCOS ( polycystic ovary syndrome ) के लक्षण:

PCOS ( polycystic ovary syndrome )
  • छोठी छोठी बातो पर गुस्सा और चिडचिडी होना,
  • शरीर पर बाल आना.
  • चेहरे पर पिम्पल आना.
  • सिर मैं भी दाने निकल आना.
  • जांघे कमजोर पड़ना.
  • पीरियड मैं सफ़ेद खून आना.
  • पीरियड लेट आना. दो दो तिन तिन महीनो तक पीरियड नहीं आना.
  • वजन बहोत बढ़ता है.
  • चेहरे पर बाल आना.
  • overy मैं अंडा नहीं बनता.
  • hairfall हो सकता है.
  • loose motion होना. और कब्ज होना.
  • सुजन होना.
  • migrane होना.

इलाज:

  • पहले जाके सोनोग्राफी कराये. उसमें पता चल जायेगा की, overy का फंक्शन ठीक से चालू हुआ है या नहीं.
  • blood test मैं पता चलेगा की, testrosteron level कम है या ज्यादा.
  • उसके बाद हार्मोन की हेल्प लेनी पड़ती है.
  • प्रोजेस्ट्रोजन suppliment डॉक्टर देते है. जिससे दोनों हार्मोन का संतुलन बना रहे. नहीं तो, गर्भनिरोधक गोली दी जाती है. जिससे, आपका वजन भी कम हो जाता है. और रेगुलर पीरियड आना चालू होता है. मेडिसिन के कारण पिम्पल and चेहरे पर बाल आना कम हो जाता है.

पीरियड को नियमित करने के लिए घरेलु उपचार :

पीरियड को नियमित करने के लिए घरेलु उपचार
  • पपीता मैं कैरटिन होने से ये अस्ट्रोजन को संतुलन बनाने मैं हेल्प करता है. और हार्मोन को disbalance होने से मदत करता है. और इससे रेगुलर पीरियड आने मैं हेल्प होती है.
  • धनिया powder भी अच्छा नुस्का है. दो गिलास पानी मैं १ चमच धनिया powder उबाले. जब तक १ गिलास न हो तब तक. और उससे दिन दो तीन बार पि लीजिये. पीरियड नियमित रूप मैं आ जायेंगे.
  • तिल को गरम पानी के साथ दिन दो बार लेंने से पीरियड रेगुलर होते है.
  • मेथी बहु कडवट होती है. but पीरियड मैं इसक उपयोग काफी हद तक अच्छा होता है. एक चमच भिगो दे. और दो कप water मैं उबाले. जब तक १ कप न हो तब तक. दिन मैं दो बार पिलिजिये. पीरियड रेगुलर हो जाएंगे.
  • दालचीनी मैं एसिडिक content होने से पीरियड मैं दर्द होने से बचता है. इसको 2 कप water मैं उबालकर ले सकते हो.
  • शहद, मिल्क and देसी गुड़ इसको मिलाकर पिने से blood purification होता है. पीरियड मैं पेट मैं दर्द होने से राहत मिलती है.
  • तुलसी एक natural एंटीबायोटिक पेनकिलर है. जिससे आपको पीरियड के  pain से राहत मिलती है.
  • अजवैन को पानी उबालकर पिने से पीरियड के दर्द से राहत मिलती है.
  • गाजर, बिट मैं zink and iron होने से पीरियड को रेगुलर करते है. इसका जूस पि सकते है. और इस मैं निम्बू, अद्रक and पुदीना भी add कर सकते हो.
  • ग्लाय्सेट्रिक content जिस fruit मैं होता है. उसे न खाए. like; केला, आम
  • natural प्रोटीन और फायबर से भरी हो. ऐसे चीजे खा सकते है. जैसे की दूध से बनी हुआ चीजे. आपकी इमुनिटी पॉवर भी अच्छी तरह बन जाएगी.
  • natural grain से रोटी बनती है. उसका सेवन करे.
  • dryfruit खाइए.
  • संतरा, अंगूर ऐसे सायंट्रस fruit खा लीजिये.
  • गुनगुने पानी का सेवन करे.
  • walking, थोड़ी एक्सरसाइज, योग करे.
  • डार्क choclate खा सकते है.

पीरियड के दौरान की जीवनशैली:

पीरियड के दौरान की जीवनशैली:
  • रेगुलर रहिये. जो भी healthy चीजे daily routine मैं ओ.
  • सुबज जल्दी उठिए. walking कीजिये. और हो सके तो प्राणायाम और योगा कीजिये.
  • गुनगुना पानी पि लीजिये.
  • प्रोटीन and फायबर युक्त पदार्थो का सेवन करे.
  • fruit जूस पि लीजिये.
  • अपने काम पर focus करने की कोशिश करिए.
  • अगर मन नहीं लगता तो, जो अच्छा लगता है. वही करने का प्रयत्न कीजिये.
  • light lunch और dinner कीजिये.
  • स्ट्रेस और चिंता से दूर रहे.
  • खाने मैं सब्जिया, अंकुरित दाल और विटामिन, खानिजे हो. ऐसे अपनी meal तयार कीजिये. like; सात्विक आहार
  • और अगर पीरियड मैं होने वाला दर्द हद से बढ़ कर बर्दाश्त नहीं होता. तो, किसी अच्छे गायनाकालोजिस्ट से जरुर दिखाइए.

दोस्तों, आपके घर मैं और आसपास किसी को भी पीरियड की परेशानी हो तो, आप ये content उन्हें share कर सकते है. उनकी बहुत समस्या का समाधान क्या करना चाहिए के इस आर्टिकल मैं जरुर मिलेगा.     

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